शैशवावस्था/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi

 शैशवावस्था/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi

 शैशवावस्था/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi

 

 

Bal vikas pdf  Test in Hindi for All Exams ,Ctet/mptet/uptet/Rtet

 शैशवावस्था/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi
शैशवावस्था/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi


short notes Part-8  
नमस्कार दोस्तों , इस आर्टिकल में हमने ” शैशवावस्था/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi ” के प्रश्नों का एक – एक करके संकलन किया है। साथ ही इस पीडीऍफ़ में हमने ” बाल विकास और शिक्षा शास्त्र ” के सभी topics को विषयवार cover किया है। इस नोट्स की विशेषता यह है , कि – इसमें आपको पढ़ने , समझने और याद करने में आसानी होगी। कियोकि इन नोट्स को आपके बालविकास एवं  शिक्षा – शास्त्र को समझने और याद करने की समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। 

शैशवावस्था की परिभाषा

 
शैशवावस्था बालक की  5 -6  वर्ष की एक  ऐसी अवस्था होती है , जिसमे बालक का शारीरिक और मानसिक विकास बहुत तेज़ गति से होता है। इस अवस्था में बालक का सांवेगिक विकास भी तीव्र गति से होता है। इस अवस्था में बालक के मस्तिष्क का 90 % प्रतिशत विकास हो जाता है। 
 
इसके अलावा कुछ मनोवैज्ञानिकों ने शैशवावस्था को निम्न प्रकार से परिभाषित  किया है। 


  •  वेलेनटाईन के अनुसार – शैशवावस्था सीखने का आदर्श काल है। “

 

  •  रॉस के अनुसार – ” किशोरावस्था शैशवावस्था की पुरावृति है। “

 

  •  फ्राइड के अनुसार – “बालक को जो बनना है , वह प्रारंभिक 4 -5  वर्षो में बन जाता  है। “

 

  •  वाटसन के अनुसार – ” शैशवावस्था की सीखने की गति अन्य अवस्थाओं से अधिक होती है। “

 

 शैशववस्था किसे कहते है

 
1 – शैशवावस्था –  ” शैशवावस्था ” का समयकाल – ” जन्म से  5 या 6  वर्ष तक की अवस्था ” का माना  जाता है। इस अवस्था में प्रारंभ  के तीन – 3 वर्ष में यानी कि – पूर्व शैशवावस्था  में  बालक का विकास – ( शारीरिक विकास और मानसिक विकास ) बहुत ही तीव्र गति से होता है। 
पूर्व शैशवावस्था – का समयकाल  जन्म से तीन वर्ष _) होता है। 
शैशवावस्था –  का समयकाल ( तीन वर्ष से छै वर्ष)होता है।



➣  इस अवस्था में बालक का शारीरिक विकास और मानसिक विकास बहुत ही तीव्र गति से होता है।  साथ ही अवस्था में बालक में कुछ प्रमुख प्रवत्तियाँ पायी जाती है। 
 जैसे कि –  अनुकरण करने की प्रवत्ति , किसी दूसरे के शब्दो को वैसे का वैसा ही दोहराने की प्रवत्ति , जिज्ञासा की प्रवत्ति होना , भाषा को सीखना अथवा सीखने की कोशिश करना। इसके साथ ही साथ इस अवस्था में बालक की – समाजीकरण होना भी आरम्भ हो जाता है।  
अनुकरण  करने की प्रवत्ति  ⬇

 

  जिज्ञासा  करने की प्रवत्ति  ⬇




भाषा को सीखने की प्रवत्ति  ⬇
 समाजीकरण की प्रवत्ति  ⬇
शैक्षिक की दृस्टि से शैशवावस्था –  शैशवावस्था  को शिक्षा की दृस्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण समझा जाता है।  कियोकि इस अवस्था में ही बालक के विकास की नीव और शिक्षा की नीव पड़ती है।  इस लिए बालविकास में इस अवस्था को शिक्षा की दृस्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। 

 

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