वंशानुक्रम और वातावरण/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi

वंशानुक्रम और वातावरण/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi

वंशानुक्रम और वातावरण/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi

 

 

वंशानुक्रम और वातावरण/ vikas pdf  Test in Hindi for All Exams ,Ctet/mptet/uptet/Rtet

 

 

 




वंशानुक्रम और वातावरण/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi
वंशानुक्रम और वातावरण/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi
SHORT NOTES- ONLY 1 TOPIC

 

नमस्कार दोस्तों , इस आर्टिकल में हमने “वंशानुक्रम और वातावरण” के प्रश्नों का एक – एक करके संकलन किया है। साथ ही इस पीडीऍफ़ में हमने ” बाल विकास और शिक्षा शास्त्र ” के सभी topics को विषयवार cover किया है। इस नोट्स की विशेषता यह है , कि – इसमें आपको पढ़ने , समझने और याद करने में आसानी होगी। कियोकि इन नोट्स को आपके बालविकास एवं  शिक्षा – शास्त्र को समझने और याद करने की समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
 
 
 
 
वंशानुक्रम और वातावरण का महत्व -बाल विकास और शिक्षा शास्त्र
वंशानुक्रम और वातावरण/bal vikas or shiksha shastra pdf notes in Hindi

 



वंशानुक्रम और वातावरण- जब  शारारिक और मानसिक गुण  एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थान्तरित हो , तो उसे हम ” वंशानुक्रम  या अनुवांशिक ” गुण कहते है। इस प्रकार बालक को भी अपने पूवजों के गुण प्राप्त होते है। इसलिए प्रायः देखा जाता है , कि बुद्धिमान माता – पिता की संतान बुद्धिमान और सामान्य माता – पिता की संतान सामान्य ही होती है।  परन्तु इस  परिभाषा में अपवाद देखने को मिला है। अतः वंशानुक्रम और अनुवांशिकता का सिद्धांत यह कहता है , बालक को अपने माता – पिता के अलावा भी अन्य पूर्वजों के गुण प्राप्त होने की संभावना रहती है। इसलिए यह आवश्यक नहीं है ,कि  सामान्य माता – पिता की संतान भी सामान्य हो अर्थात वो बुद्धिमान भी हो सकते  है।
 

वंशानुक्रम की परिभाषा

 

 

1- थार्नडाइक के अनुसार – ” बालक की मूल शक्तियों का कारण वंशानुक्रम है। “

 

 

2- बी-एन -झा – के अनुसार – ” वंशानुक्रम  व्यक्ति की जन्मजात विशेषताओं का पूर्ण योग है। “

 

3 – पीटरसन के अनुसार – ” माता – पिता और पूर्वजों के द्वारा जो विशेषताएं प्राप्त होती है , उसे हम वंशानुक्रम कहते है। 

 

4 – जेम्स ड्रेवर के अनुसार – ” जब बालक में उसके माता – पिता के गुणों और विशेषताओं का हस्तांतरण होता है , तो उसे हम ” वंशानुक्रम ” कहते है। 

वंशानुक्रम का महत्व



➤यदि बालक के पूर्वजो में – बालक के मामा पक्ष से अथवा चाचा के पक्ष से कोई व्यक्ति बुद्धिमान नहीं होता है। वह बालक – अच्छे से अच्छा ” वातावरण मिलने पर भी – एक सीमा तक ही आगे बढ़ पायेगा।

 
 
➤ कभी – कभी हम देखते है.कि – यदि बालक को अच्छे से अच्छा वातावरण मिल भी जाए , तब भी उन बालको में चोरी करना – , क्रूरता , आदि पायी जाती है। जिसका कारण – बालक का वंशानुक्रम होता है। 
 
कुल – मिलाकर उपरोक्त तथ्यों के आधार पर हम कह सकते है , कि – वंशानुक्रम और वातावरण  का बालक के विकास में समान योगदान होता है। अर्थात – बालक के वातावरण और वंशानुक्रम सम्बन्धी कारक एक दूसरे के पूरक होते है। जिनमे एक भी कारक का कम अथवा ज्यादा होना बालक के विकास को समान रूप से प्रभावित करता है।

बालक के विकास में वंशानुक्रम का प्रभाव

 



प्रश्न 1 – माता – पिता से बच्चो को प्राप्त होने वाले गुणों को क्या कहते है ?

उत्तर – माता – पिता से बच्चो को प्राप्त होने वाले गुणों को – “वंशानुक्रम ” कहते है। 

 
 
प्रश्न 2 – “किसी भी विषय को रटना ”  किस बालक का लक्षण नहीं होता है ?
उत्तर – किसी भी विषय को रट कर सुना देना – ” बुद्धिमान बालक ” लक्षण नहीं होता है। 
 
प्रश्न 3 – यदि हम दो जुड़वां बालको को दो अलग – अलग जगह पर रखते है। जिसमे एक बालक को – धर्म – संस्कृति , और संस्कार का वातावरण मिलता है , तो वही दूरी ओर दूसरे बच्चे को – अंधविश्वास एवं रूढ़िवाद का वतावरण मिलता है। तो दोनों बालको के बड़े होने पर उनके विचारो सर्वाधिक प्रभावित करने वाला कारक कौन सा होगा ?



उत्तर – इस स्थति में उन बालको को जो सर्वाधिक प्रभावित करने वाला कारक होगा वह – उनका “सांस्कृतिक कारक ” होगा।  अर्थात सांस्कृतिक रूप से वे बालक एक -दूसरे से पूरी तरह से भिन्न होंगे।
 
प्रश्न 4 – कथन – बालक क्या कर रहा है ? और उसका विकास क्यों  नहीं हो रह है ? इस प्रश्न की उत्तर अथवा व्याख्या किस प्रकार दी जा सकती है ?
 
उत्तर – इस प्रश्न का सही उत्तर देने के लिए – बालक के वंशानुक्रम और वातावरण का अध्ययन करना अनिवार्य होता है।  कियोकि इसके बाद ही इस सम्बन्ध में बालक से सम्बंधित जानकारी प्राप्त हो सकती है। 
 
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