World Geography PDF For All Exams In Hindi 

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World Geography notes for all exams  in hindi

(विश्व भूगोल ) 

 

World Geography PDF For All Exams In Hindi  

World Geography PDF For All Exams In Hindi

 

 

 नमस्कार दोस्तों ,इस आर्टिकल में हम World Geogrphy PDF Download (विश्व भूगोल ) “ से सम्बंधित प्रशनोत्तर को जानेगे और पढ़ेंगे। ये सभी world geography के प्रश्नोत्तर आपके विभिन्न परीक्षाओं हेतु अत्यंत आवश्यक है। 

 

 

प्रश्न -1  भूसंचलन किसे कहते है ?

 


उत्तर –  भू संचलन- पृथ्वी की सतह विभिन्न प्रकार के बलों के कारण परिवर्तित होती रहती है। यही भू संचलन की क्रिया कहलाती है। 






प्रश्न – 2 – भूसंचलन कितने प्रकार का होता है ?

 


उत्तर – यह बल दो प्रकार के होते हैं।

अंतर्जात और बहिर्जात बल

 

 

1- अंतर्जात बल – यह बल पृथ्वी की विभिन्न पर परतों से उत्पन्न होता है।

 

2- बहिर्जात बल – यह बल पृथ्वी की बाहें कार्य को द्वारा उत्पन्न होता है। जैसे कि – हवा , मौसम, जल, हिमानी आदि।

 



1- अंतरजति बल – इस बल को पटल विरूपण बल एवं आकस्मिक अंतरजति बल में विभाजित किया जाता है। जिसमें आकस्मिक अन्यर्जति बल भूकंप एवं ज्वालामुखी से उत्पन्न होता है। जबकि पटल विरूपण बल पर्वत निर्माण एवं महाद्वीप भागों में विभिन्न प्रकार की आकृतियों का निर्माण करने हेतु जिम्मेदार होता है।

 

 

* पर्वत निर्माणकारी बल- महाद्वीपीय क्षेत्रोंउ में पर्वतों के निर्माण के लिए दो प्रकार के बल जिम्मेदार हैं।


1- संपीड़न मूलक बल


2- तनाव मुल्क मूलक बल


1- संपीड़न मूलक बल – इस बल से वलय/बलित पर्वतों का निर्माण होता है। जबकि तनाव मूलक बल भ्रंश एवं ब्लॉक, हॉस्टर पर्वतों का निर्माण होता है।




* वलन- पृथ्वी की सतह पर संपीड़न मूलक बल के कारण सदा की दो भुजाएं एक दूसरे की तरफ गति करती है। और बलन का निर्माण करती हैं। इस प्रकार से अभिनति का निर्माण होता है।


* वलन के प्रकार


1- सममति वलन – इस प्रकार की वलन में दोनों भुजाओं के बीच का झुकाव समान होता है। स्विट्जरलैंड का जूरा पर्वत इसका प्रमुख उदाहरण है।


2-असम्मति वलन – इस प्रकार के वलन में दोनों भुजाओं के बीच का ढाल या कोण अलग अलग होता है।


3-एकदिन्नति बलन – इस प्रकार के वलन में एक भुजा का झुकाव न्यून कोण होता है। जबकि दूसरी भुजा का झुकाव 90 डिग्री होता है।


4- अति वलन – इस प्रकार के वलन में एकदिन्नति वलन से अधिक संपीडन बल लगता है। जिससे पूरा अपनति एक तरफ झुक जाता है।


5- परिवलित- इस प्रकार के वर्णन में संपीड़न बल बहुत अधिक जाता है। जिससे कि दोनों भुजाएं दूसरे के समानांतर हो जाती है।

 

 

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ग्रीवाखंड- जब परिवलित वलन टूट कर दूसरी सटे पर चला जाता है। तो उसे ग्रीवा खंड कहते हैं।उदाहरण के लिए- भारत की कश्मीर घाटी


* भ्रंश- पृथ्वी की सतह पर संपीड़णात्मक एवं तनाव मूलक बलों के कारण सतह के भूखंड पर दरारों का निर्माण हो जाता है। जिसके सहारे भूखंड दूसरे के ऊपर चलते रहते हैं। जिसे हम भ्रंश कहते हैं।

* भ्रंश निम्न प्रकार के होते हैं।


1- सामान्य भ्रंश- यह भ्रंश तनाव बल के कारण जब एक खंड नीचे की तरफ गतिविधि करता है तो इस प्रकार के भ्रंश को सामान्य भ्रंश कहते हैं।


2- विपरीत भ्रंश- इस प्रकार के भ्रंश में संपीड़न बल कार्य करता है। जिसमें एक भूखंड दूसरे वाले भूखंड पर ऊपर की तरफ उभर जाता है।


3- क्षेतिज भ्रंश- इस प्रकार के भ्रंश में भूखंड आपस के क्षितिज दिशा में गति करता है।



4- सोपानी भ्रंश- इस प्रकार के भ्रंश में सभी भूखंड एक दिशा में क्रमागत गति करने के कारण सोपानी भ्रंश का निर्माण करते हैं।


* भ्रंश घाटी- भ्रंश घाटी दो समानांतर खंडों के बीच वाले भूखंडों का अवतलन होने के कारण भ्रंश घाटी का निर्माण होता है।

उदाहरण के लिए- ग्रेट अफ्रीकन वैली


* रैंप घाटी- जब दो भ्रंश के बीच वाला भूखंड अपने स्थान पर रहता है तथा आसपास के खंड ऊपर की ओर गति करते हैं, तब रैंप घाटी का निर्माण होता है।
उदाहरण के लिए- ब्रह्मपुत्र नदी घाटी


* हस्टार पर्वत- जब मध्य भूखंड ऊपर की तरफ गति करता है तथा उसके किनारे वाले भूखंड अपने स्थान पर यथावत बने रहते हैं तो ऊपर उठा हुआ पर्वत हॉस्टर पर्वत कहलाता है।


* भ्रशोथ पर्वत- जब दो भ्रंश के पास वाले भूखंड निचले भाग की ओर गति करते हैं। एवं मध्य भाग यथावत अपने स्थान पर रहता है। तो ऐसी स्थिति में भ्रशोतथ पर्वत का निर्माण होता है।


* महाद्वीपीय जन संचलन- इस प्रकार के संचलन में भागों का उत्थान होता है एवं कुछ भागों का अवकलन होता है। इस प्रक्रिया से विभिन्न प्रकार की भू आकृतियों का निर्माण होता है।




* अपक्षय- जलवायु, तापमान एवं मौसम के द्वारा जब रासायनिक तथा यांत्रिक प्रक्रियाओं से चट्टानों को उसी स्थान पर तोड़ने क्रिया अपक्षय कहलाती है।


* अपरदन- जब चट्टानों के टूटे भागो का स्थानांतरण करके दूसरे भागों पर जमा किया जाता है तो अपरदन कहलाता है। जैसे कि नदिया

 

* अपघर्षण- इस प्रक्रिया में अवसाद के कड़ के द्वारा घाटी की सतह एवं उसके किनारों पर घर्षण की वजह से अपरदन होता है।

 

* जल दबाव क्रिया- यह जल के बहाव के द्वारा उत्पन्न होने से बना हुआ अपरदन है।

 

 

* सनीघर्षण- इस प्रक्रिया में अवसादो के कणों के बीच घर्षण की वजह से अपरदन होता है।





* उत्पाटन- इस प्रकार का अपरदन हिमानी या हिमनदी से होता है।

 


 दोस्तों , हमे आशा है ,कि World Geogrphy PDF Download (विश्व भूगोल )  के ये प्रश्नोत्तर आपको महत्वपूर्ण लगे होंगे। धन्यवाद 

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